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आपकी अमोल शुभकामनाओं के लिए ह्रदय से आभारी हूँ.

आपकी अमोल शुभकामनाओं के लिए ह्रदय से आभारी हूँ. ये ज्ञात-अज्ञात दुआएं ही हैं जिनकी बदौलत ये यज्ञ पूरा हुआ l अभी भी विश्वास नहीं होता कि पूरी हो गयी पी.एच. डी. l पिछले कई सालों से ये मेरे अस्तित्व के साथ यूँ चिपक गयी थी कि यही मेरी सीमा और यही मेरा विस्तार हो गयी थी. कुछ रास्ते, कुछ लोगों के लिए आसान और कुछ लोगों के लिए बहुत ही कठिन हो जाते हैं; इसमें काबलियत बस एक पहलू है l मेरे लिए यह रास्ता बहुत ही कठिन हो गया था l सैकड़ों बार सोचा कि इस रास्ते की मंजिल का मुंह मै नहीं देख सकूँगा l शुभेक्षाएं एवं दुआओं ने ही मुझे उबार लिया l और सच में रास्ते के इस किनारे आकर मै वही नहीं रह गया हूँ, जो रास्ते के उस छोर पर था l सीखा तो बहुत कुछ l पर शायद सबसे बड़ी सीख जो सीखी वो है-धैर्य l स्वयं पे विश्वास रखते हुए धैर्य का दामन पकडे हुए चलते जाना ...बस चलते जाना.......,....! और जब भी जितना भी मौक़ा मिल जाये ..खिलखिलाते रहना-हँसते और हंसाते रहना.... smile emoticon शुक्रिया   ‪#‎ JNU‬   l डेमोक्रेटिक स्पेस की रट लगाना और डेमोक्रेटिक स्पेस उपलब्ध करवाने में बहुत अंतर है l  ...

आधी रात हो चली है.

आधी रात हो चली है. दिल्ली में झमा-झम बारिश हो रही है. काश के ये बारीश जुलाई-अगस्त में हुई होती तो मेरे पापाजी को कड़ी धूप में खेतों में पानी ना चलवाना पड़ा होता.उनकी तबियत ख़राब हुई सो अलग.JNU के इस ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में बैठा-बैठा मै कई बार ये सोच रहा था कि आज का अजीब दिन है.भगदड़ से ५ छोटी लड़कियां मर गयीं तो कैम्पस में भी एक स्टुडेंट ने उचित हैल्थ फसिलिटी के अभाव में दम तोड़ दिया. पूरे दिन कई बातें सोचता रहा. मसलन , अब कुछ नौकरी-वौकरी के बारे में सोचना पड़ेगा.आस-पड़ोस में लड़के सारे काबिल निकल रहे है एक मै हूँ कि पढ़ाई बढ़ती ही जा रही है. एम.फिल. करके JNU से सोचा था कि किसी ना किसी काम का तो होई जाऊंगा...पर एकदम से ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा. इस प्रसिद्द कैम्पस का भी एक मिथक जैसा कलेवर बन पड़ा था,,टूटा. वैसे ढेर सारी खास बातें है इस कैम्पस में पर धीरे - धीरे यहाँ भी अनचाही तब्दीलियाँ आती जा रही हैं, इसका सबसे प्रमुख कारण है नयी आने वाली फैकल्टी में आचार्यत्व का अभाव. वजह...बेहद फोर्मल के कलेवर में होने वाली अपारदर्शी चयन प्रक्रिया.अब यहाँ भी भाई-भतीजावाद दिख जायेगा और देश की कलुषित रा...