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वसुन्धरा दी की अद्भुत कविताओं का संकलन 'शब्द नदी है' की समीक्षा

Shyam जी के निर्देश पर वसुन्धरा दी की अद्भुत कविताओं का संकलन 'शब्द नदी है' की समीक्षा का अवसर प्राप्त हुआ था। यह समीक्षा जन संदेश टाइम्स में प्रकाशित हुई है। दी को उनकी कविताओं के लिए पुनश्च बधाइयाँ...!  ‪#‎श्रीशउवाच‬ http://www.jansandeshtimes.in/index.php…

पढ़ लिए समस्त पृष्ठ। फिर परखा मैंने, कवि की एक कविता की पंक्ति से स्वयं को.... “पतझर में भी खिला करते हैं कई फूल क्यों इंतज़ार करे है बहार का मत ढूँढा कर शायरी में वजन पूछना है तो पता पूछ प्यार का मैंने सोचा कि मै ही क्या खरा उतरा हूँ इस कसौटी पर। इन्हें पढ़ते हुए क्या तलाश कर रहा था मै....शब्द, शिल्प, विन्यास, भाव, अलंकार, व्याकरण या  प्यार........! चूंकि ये पंक्ति शुरू में ही आ जाती है तो बच जाता हूँ, कोई बचकानी हरकत नहीं करता मै और फिर बस प्यार, प्यार और बस प्यार ही निरखता जाता हूँ मै समस्त रचनाओं में। जी हाँ, समस्त कवितायें, उनके समस्त अंग-प्रत्यंग प्रियतम के प्यार में रची-सनी हैं। कभी प्रियतम की याद में पिघल रहीं हैं,