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मानविकी विषयों की हीन समझ

जिस समाज में मानविकी विषयों को विज्ञान एवं तकनीकी विषयों से हीनतर समझने की अपरिपक्वता व्याप्त है , खासे पढ़े-लिखे लोग भी मानविकी विषयों की महत्ता नगण्य ही समझते हैं, वे नहीं समझ सकते कि ये विद्यार्थी लोग क्यों विरोध कर रहे हैं सीसैट का. समाज और संस्कृति की बुनियादी समझ, विज्ञान एवं तकनीकी विषयों में भी सही मायने में उपयोगी इनोवेशन को जन्म देती है, अन्यथा उनमें विनाश के ही बीज रोपे हुए होते हैं. विज्ञान विषयों की तकनीकियों के माध्यम से, कला विषयों में भी उपयोगिता एवं यथार्थ का तत्व प्रमुखता से उभरता है. ज्ञान का कोई क्लिष्ट विभाग विभाजन नहीं हो सकता. अपने अपने अनुशासन में सभी परिश्रम करते हैं और यथासंभव योग भी देते हैं. मशीन बनाने वाले, समझने वाले लोगों को भी रचनात्मक योगदान देने के लिए एक शांत, उन्नत बेहतर समाज और सरकार चाहिए होता है...ताकि विकास का मूल उद्देश्य सुरक्षित रह सके. एक उन्नत बेहतर समाज और सरकार के लिए मानविकी विषयों में भी निरंतर शोध एवं पठन-पाठन की आवश्यकता होती है. 
दुनिया के बाकि उन्नत देश जिनकी हम बेशर्म नक़ल करना चाहते हैं वे अपनी भाषा एवं इस मानविकी जरूरत की महत्ता क…