तो फिर तुम्हारी याद आती है...परम !



....कभी जब कुछ अलग सा अनुभव होने लगता है, 

महसूस होने लगती है,हवा की आवाज..,


गूंजने लगता है सारा परिवेश, किसी अनुगूँज से !


घटने लगता है रोम रोम में एक शंखनाद , 


अंतस में झंकृत होने लगता है एक स्वरमय प्रस्फुटन , 


परिचय पाने लगता है मन, नीरवता के सौन्दर्य से , 


खुलने लगता है, हृदयपट स्वतःस्पंदन से 


जब शून्य में प्रेरणा पल्लवित होने लगती है...


तो फिर तुम्हारी याद आती है...परम !


#श्रीश पाठक प्रखर 
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