....वो लड़कियां


पाँव ;

फूल पर आ गया , 

क्योंकि वो 'गिरा' हुआ था. 

......पर ये ख़ुद तो नही गिरा होगा .

..इसका सौन्दर्य ,इसका घाती. 

तोड़ा; पर सजाया नहीं इसे कहीं. 

...मुरझाना-सूखना तो सहज था; 

पर इस तरह,रौदा जाना ..... 

,,...किसी ने इसे रास्ते में गिरा दिया. ..,,

,..'ठीक उन लड़कियों की तरह......................!

#श्रीश पाठक प्रखर

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